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Monday, 24 July 2017

चीन पर आक्रामक हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप, नेवी को दी खुली छूट

बीजिंग (एजेंसी)। डोकलाम सीमा विवाद को लेकर भारत पर आक्रामक हुए चीन के लिए अमेरिका ने चिंता बढ़ा दी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक आक्रामक कदम से चीन की बैचेनी बढ़ गई है। ट्रंप ने अपनी नौसेना (यूएस नेवी) को दक्षिण चीन सागर में खूली छुट दे दी है जिसे यहां अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहे चीन पूरी तरह से दवाब की स्थिति में आ गया है।
ट्रंप के इस फैसले से ड्रैगन के दक्षिण चीन सागर पर दावेदारी पेश करने को बड़ी चुनौती मिली है। आपको बता दें कि चीन के अलावा पांच अन्य देश वियतनाम, मलयेशिया, इंडोनेशिया, ब्रुनेई और फिलीपींस दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा जताते हैं।
चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी फिलहाल अपने कॉन्क्लेव की तैयारी कर रही है जिसमें कई बड़े राजनैतिक बदलाव होने वाले हैं और ऐसे समय में अमेरिका द्वारा उठाए गए इस कदम से चीन की बढ़ती नौसेना दक्षिण चीन सागर में ही उलझी रहेगी और चीन पर भारत और जापान जैसे दूसरे देशों के साथ सीमा विवाद के मसले पर दवाब पड़ेगा।
ग्लोबल टाइम्स से बात करते हुए चीनी नौसेना के एक अधिकारी ने बताया कि चीन ने अपने आधुनिक गाइडेड मिसाइल विध्वंसक भेजकर रूस के प्रति अपनी गहरी दोस्ती की ओर इशारा किया है। इसके साथ ही हमें उकसाने वाले देशों के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण संदेश है। आपको यह भी बता दें कि चीन अंतर्राष्ट्रीय अदालत में चीन पहले मात खा चुका है। हेग स्थित अंतर्राष्ट्रीय अदालत ने चीन द्वारा साउथ चाइना सी पर जताए गए दावे को खारिज कर उसे गैरकानूनी और अतिक्रमण वाला बताया था। लेकिन चीन ने कोर्ट के फैसले को नकार दिया।

Source:-Jagran
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Tuesday, 16 May 2017

US makes U-turn, to take an interest in One Belt One Road activity



BEIJING/NEW DELHI: The US has made a sudden U-turn and chosen to take an interest in the One Belt, One Road (OBOR)+ activity being sorted out by China with much flourish in Beijing this Sunday and Monday.

A decent illustration is the China-Pakistan Economic Corridor through which China is hoping to connection Xinjiang with Gwadar port, which it has worked in Balochistan.

Perused this story in Gujarati

Beijing has demonstrated sparse respect for the way that it encroaches on India's sway, going as it does through the Gilgit-Baltistan district which India guarantees as its own.

There may not be any prompt material misfortune to India in the event that it goes unrepresented on the grounds that OBOR is not a participation based organisation+ .

Actually, India may be applauded in a few quarters for taking an intense principled stand. Sources in Delhi said India, best case scenario might be spoken to by junior international safe haven authorities and precluded sending any abnormal state dignitary.

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